2014


Song : O Palanhare, Nirgun Aur Nyare
Movie : Lagaan 
Aartist : DJ Shivam
Singer : Lata Mangeshkar, Udit Narayan
Music By : A R Rahman
Lyricist : Javed Akhtar

Free Download DJ Mix Bhajans Here :-




O Palanhare, Nirgun Aur Nyare Hi Hindi Lyrics :-


ओ पालनहारे, निरगुन और न्यारे - 2
तुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं

हुमरी उलझन सुलझाओ भगवान
तुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं
तुम्हे हुँका हो संभाले
तुम्हे हमरे रखवाले
तुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं

तुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं
तुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं

चंदा में तुम्हे तो भरे हो चाँदनी
सूरज में
उजाला तुम्हे से
यह गगन है मगन, तुम्हे तो दिए हो इससे तारे
भगवान, यह जीवन तुम्हे ना संवारोगे
तो क्या कोई संवारे
ओ पालनहारे, निरगुन और न्यारे
तुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं - 2

जो सुनो तो कहे प्रभुजी हमरी है बिनटी
दुखी जान को धीरज दो
हारे नहीं वो कभी दुख से
तुम निर्बल को रक्षा दो
रह पाए निर्बल सुख से
भक्ति को शक्ति दो

भक्ति को शक्ति दो

जाग के जो स्वामी हो, इतनी तो अरज सुनो
है पाठ में आँधियारे
डेडॉ वरदान में उजियारे

(ओ पालनहारे, निरगुन और न्यारे
तुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं
हुमरी उलझन सुलझाओ भगवान
तुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं) - 3

O Palanhare, Nirgun Aur Nyare Hi English Lyrics :-

O Paalanhaare, Nirgun Aur Nyaare
O Paalanhaare, Nirgun Aur Nyaare
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin
Humri Uljhan Suljhaao Bhagwan
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin
Tumhe Humka Ho Sambhaale
Tumhe Hamre Rakhwaale
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin

Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin

Chanda Mein Tumhe To Bhare Ho Chaandni
Sooraj Mein Ujaala Tumhe Se
Yeh Gagan Hai Magan, Tumhe To Diye Ho Isse Taare
Bhagwan, Yeh Jeevan Tumhe Na Sanwaaroge
To Kya Koi Sanwaare
O Paalanhaare, Nirgun Aur Nyaare
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin
Jo Suno To Kahe Prabhuji Hamri Hai Binti
Dukhi Jan Ko Dheeraj Do
Haare Nahin Voh Kabhi Dukh Se
Tum Nirbal Ko Raksha Do
Reh Paaye Nirbal Sukh Se
Bhakti Ko Shakti Do

Bhakti Ko Shakti Do

Jag Ke Jo Swami Ho, Itni To Araj Suno
Hai Path Mein Andhiyaare
Dedo Vardaan Mein Ujiyaare

O Paalanhaare, Nirgun Aur Nyaare
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin
Humri Uljhan Suljhaao Bhagwan
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin
O Paalanhaare, Nirgun Aur Nyaare
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin
Humri Uljhan Suljhaao Bhagwan
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin
O Paalanhaare, Nirgun Aur Nyaare
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin
Humri Uljhan Suljhaao Bhagwan
Tumre Bin Hamra Kaunon Naahin.



Enjoy Shredhya Shri Gaurav Krishan Goswami Ji Maharaj And Mridul Krishna Ji Maharaj Gopi Geet And Other Radhe Krishna Bhajans.....

गोपाल सहारा तेरा है. नंदलाल सहारा तेरा है.
तू मेरा है मैं तेरा हूँ. मेरा और सहारा कोई नहीं.
तू माखन चुराने वाला है. तू चित को चुराने वाला है.
तू गौयें चराने वाला है, तू बंसी बजाने वाला है.
तू रास रचाने वाला है. सारे जग को नचाने वाला है 

Free Download Mridul Gaurav Ji Radhe Krishna Bhajans :-



3. Dukh Men Mat Ghabrana Panchi By Gaurav Ji Live.mp3


Ek arz meri sunlo, dildaar he Kanheiya Hindi Lyrics :-


Ek arz meri sunlo, dildaar he Kanheiya 

एक अर्ज मेरी सुनलो, दिलदार हे कन्हैया ,
कर दो अधम की नैया, भव पार हे कन्हैया ।

अच्छा हूँ या बुरा हूँ , पर दास हूँ तुम्हारा ,
जीवन का मेरे तुम पर, है भार हे कन्हैया ||१|

तुम हो अधम जनों का, उद्धार करने वाले ,
मैं हूँ अधम जनों का, सरदार हे कन्हैया ||२||

करूणानिधान करूणा, करनी पडेगी तुमको ,
वरना ये नाम होगा, बेकार हे कन्हैया ||३||

ख्वाहिश ये है कि मुझसे, दृग बिंदु अश्रु लेकर ,
बदले में दे दो अपना, कुछ प्यार हे कन्हैया ||४||

''जय श्री राधे कृष्णा ''


Ghunghat Ke Pat Khol

Kabir Das, Rahim Das, Surdas,Tulsidas, Rashkhan Ke Dohe....

Album : Ghunghat Ke Pat Khol
Artist : Mandan Gopal, Various Artists
Released : Dec 2008
Label : AAP Media

Free Download Kabir Rahim Surdas Ji Ke Dohe In Mp3 :-


1. Bhajman Ram Naam.MP3

2. Binu Satsang Vivek.MP3

3. Kachu Lena Na Dena.MP3

4. Karle Bhajan Kamaai.MP3

5. Lagan Bin Jaage Na Nirmohi.MP3

6. Man Ki Baat Na Mano Sadhu.MP3
7. Man Tu Paar Utar.MP3

8. Musaphir Kya Sove.MP3

9. S Talwar, K Krishanmurti — Jhini Jhini Re.MP3

10. Sadho Yah Tan Mithya.MP3

11. Suno Suno Vachan.MP3

12. Toko Peev Milenge Ghunghat.MP3

Kuchu Lena Na Dena Magan Rehna Hindi lyrics :-


कछु लेना न देना मगन रहना, 
कछु लेना न देना मगन रहना,

पांच तत्व का बना पिंज़रा जा मैं बोले मेरी नैना 
कछु लेना न देना मगन रहना,

तेरा साईं तेरे अंदर, अब तो देख सखी खोल नैना...
कछु लेना न देना मगन रहना,

गहरी नदिया नाव पुरानी केंवटिया से मिले रहना।
कछु लेना न देना मगन रहना,

कहे कबीर सुनो भाई साधो,
गुरु के चरण में लीपटे रहना......

Kuchu Lena Na Dena Magan Rehna English lyrics :-

Paanch tatva ka bana pinjdha,
Jaa mein bole meri maina

Kuchu lena na dena magan rehna
Kuchu lena na dena magan rehna

Gehri nadiya naav puraani,
Khevatiyah se miley rehna

Kuchu lena na dena magan rehna
Kuchu lena na dena magan rehna

Tera saayeen tere man mein basat hai,
Sakhi khol kar dekh naina

Kuchu lena na dena magan rehna
Kuchu lena na dena magan rehna

Kehat kabira suno bhai saadho,
Guru ke charan mein lipatt rehna

Kuchu lena na dena magan rehna
Kuchu lena na dena magan rehna



Enjoy Laadli Adbhut Nazara Tere Vrindavan Min Hai Sung By Shri Krishna Chandra Sastri Thakurji Maharaj With Some Other Bhajans...

देने वाले श्याम प्रभु से धन और दौलत क्या मांगे ।
श्याम प्रभु से मांगे तो फिर नाम और इज्ज़त क्या मांगे ।

Free Download Krishna Chandra Sastri Ji Krishna Bhajans :-


1. Karunamai Krishan Priya BhavaPaar.MP3

2. Ladali Adbhut Nazara Tere Vrindavan Mein Hai.mp3

3. Naiyya Le Chal Perli Par.MP3

4. Nandlal Pyare Yashoda Dulare.MP3

5. Om Namo Bhagwate Vasudevaya.MP3

6. Shri Krishan Govind Hare Murari.MP3

7. Sawariya Braja Ke Ho Tum To Aadhar.MP3

8. Teri Ankhiyan Hain Jadu Bhari.MP3


Ladli Adbut Nazara Tere Barsane Me Hai Hindi Lyrics :-


Ladli Adbut Nazara Tere Barsane Me Hai

लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में है।
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
बेसहारों को सहारा तेरे बरसाने में है ॥

झांकीया तेरे महल की कर रहे सब देवगण।
आगया बैकुंठ सारा तेरे बरसाने में है॥

हर लता हर पात में है तेरी दया की वो झलक।
हर घडी यशोमती दुलारा तेरे बरसाना में है॥

अब कहाँ जाऊं किशोरी तेरे दर को छोड़ कर।
मेरे जीवन का सहारा तेरे बरसाने में है॥

यूँ तो सारे बृज में ही है तेरी लीला का प्रताप।
पर अनोखा ही नज़ारा, तेरे बरसाने में है ॥

मैं भला हूँ या बुरा हूँ पर तुम्हारा हूँ सदा।
अब तो जीवन का किनारा तेरे बरसाने में है॥



Download And Play Online Shri Mridul Krishna Ji And Gaurav Krishna Ji Live Bhagwat Mp3 Bhajans...

तिरछा है किरीट कसा उसमें, तिरछा वनमाल पडा रहता है
तिरछी कटि काछनि है जिसमें, सुख सिंधु सदा उमड़ा रहता है
तिरछे पद कुञ्ज कदम्ब तरे, तिरछे दृग तान खड़ा रहता है
किस भांति निकाले कहो दिल से,तिरछा घनश्याम अड़ा रहता है .....

Free Download Mridul And Gaurav Krishna Ji Bhagwat Bhajans :-




Bharosa Karle Bhawan Ka Tujhe Dhoka Nahi Hoga Hindi Lyrics :-


Bharosa Karle Bhawan Ka Tujhe Dhoka Nahi Hoga

भरोसा करले भगवन का तुझे धोका नहीं होगा,
ये जीवन बीत जायेगा तुझे रोना नहीं होगा....

कभी शुख है कभी दुःख है ये जीवन धुप है छाया,
न कर अभिमान तू धन का ये पल दो पल की माया है...

जो सुख आये तो हंस लेना जो दुःख आये तो सह लेना,
सुना ना और किसी को ना गुरु जी को सुना देना...

ना कर अभिमान तू धन का ना तेरे साथ जायेगा,
ना जायेगा ये रथ हाथी नाम एक साथ जायेगा.....

ये बचपन खेल में खोया जवानी नींद भर सोया,
बुढ़ापा देख कर रोया प्रभु अब आसरा तेरा...

भरोसा करले भगवन का तुझे धोका नहीं होगा,
ये जीवन बीत जायेगा तुझे रोना नहीं होगा....



Album : Door of Faith
Artist : Krishna Das
Producer: Rick Rubin
Genres: World, Music, Asia
Year : 2003
Label : Indieblu Music

"...Krishna Das's fifth album, Door of Faith, is a collection of Sanskrit prayers in some of the most intimate moments of communion ever recorded." 

Free Download Door of Faith By Krishna Das :-




Rudrashtakam (Shiva Stuti) :-


Rudrashtakam (Shiva Stuti) Hindi Lyrics

 ॥  श्रीरुद्राष्टकम् ( तुलसीदास ) ॥ 

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १ ॥

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २ ॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३ ॥

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ ४ ॥

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् ।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ ५ ॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्द संदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ ६ ॥

न यावत् उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत् सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ ७ ॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥ ८ ॥

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥

 ॥ इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं संपूर्णम् ॥



The 1st of July 1960 witnessed the birth of Shri Krishna Chandra Shastriji (Shri Thakurji) in the small village of Lakshmanpura (Mathura, U .P.) near Vrindavan. Pandit Shri Ram Sharanji Upadhyaya and Shrimati Chandravati Devi Upadhyaya are his religious parents devoted to the epic of Bhagwat and dedicated to tending the sacred cow.

Religious greats like Swami Shri Karpatriji Maharaj, Swami Shri Akhandanandji Saraswati, Shri Ram Chandra Dongreji Maharaj, Shri Murari Bapu and Shri Ramsukh Dasji moulded Thakurji's thinking and had a deep-rooted influence on his mind. The institution of Shri Krishna Prem Sansthan was founded under the guidance of Shri Thakurji. The teachings of Bhagwat and Vedas are offered here without any cost to students. On the auspicious occasion of Ram Navmi in the year 2003, the Sansthan has established 'Goshala'.

By the grace of Shri Krishnaji, Shri Thakurji may well be the first young Indian religious teacher who has accomplished the feat of conducting more than 961 weeks of Shrimad Bhagwat Gyan Yagya. He has received tremendous appreciation all over the country and abroad wherever he has unfolded the holy words of the Bhagwat. Thakurji's rendition of Ramayana and Geeta is equally inspiring.

Free Download With Hindi Lyrics Krishnashtakam, Madhurashtakam (Adharam Madhuram Badanam Madhuram), Gopi Geet, Damodar stotra (Karar vinde na padarvindam) And Some Other Radha Krishna Bhajans With Hindi Lyrics Sung By Shri Krishna Chandra Sastri Thakurji.

Free Download Shri Krishna Chandra Sastri Thakurji Mp3 Bhajans :-




Krishnashtakam - Text, Lyrics, Meaning, Translations :-


Krishnashtakam Hindi Lyrics

वसुदॆव सुतं दॆवं कंस चाणूर मर्दनम् ।
दॆवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम् ॥

अतसी पुष्प सङ्काशं हार नूपुर शॊभितम् ।
रत्न कङ्कण कॆयूरं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम् ॥

कुटिलालक संयुक्तं पूर्णचन्द्र निभाननम् ।
विलसत् कुण्डलधरं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरम् ॥

मन्दार गन्ध संयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजम् ।
बर्हि पिंछाव चूडाङ्गं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम् ॥

उत्फुल्ल पद्मपत्राक्षं नील जीमूत सन्निभम् ।
यादवानां शिरॊरत्नं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम् ॥

रुक्मिणी कॆलि संयुक्तं पीताम्बर सुशॊभितम् ।
अवाप्त तुलसी गन्धं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम् ॥

गॊपिकानां कुचद्वन्द कुङ्कुमाङ्कित वक्षसम् ।
श्रीनिकॆतं महॆष्वासं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम् ॥

श्रीवत्साङ्कं महॊरस्कं वनमाला विराजितम् ।
शङ्खचक्र धरं दॆवं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम् ॥

कृष्णाष्टक मिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठॆत् ।
कॊटिजन्म कृतं पापं स्मरणॆन विनश्यति ॥

Krishnashtakam English Lyrics, Meaning, Translations

Vasudeva sutham devam,
Kamsa Chanoora Mardhanam,
Devaki Paramanandam,
Krishnam Vande Jagat Gurum. 1

Salutations to the teacher of the world, Krishna,
Who is the God who is the son of Vasudeva,
Who killed Kamsa and Chanoora,
And who gave immense joy to Devaki.

Athasee pushpa sangasam,
Hara noopura Shobitham,
Rathna kankana keyuram,
Krishnam Vande Jagat Gurum. 2

Salutations to the teacher of the world, Krishna,
Who decorates himself with flowers of Athasee.
Who shines in garlands and anklets that he wears.
And who has a bangle made of jewels in his right hand.

Kutilalaka samyuktham,
Poorna chandra nibhananam,
Vilasath kundala dharam,
Krishnam Vande Jagat Gurum. 3

Salutations to the teacher of the world, Krishna,
Who is blessed with black curly hair,
Who is very similar to the full moon,
And who shines in his ear drops.

Mandhara gandha samyuktham,
Charuhasam chathurbhujam,
Barhi pinjava choodangam,
Krishnam Vande Jagat Gurum. 4

Salutations to the teacher of the world, Krishna.
Who has the sweet scent of mandara flowers,
Who has pretty smile and four arms,
And who decorates is hair with peacock feathers.

Uthfulla padma pathraksham,
Neela jeemutha sannibham,
Yadavaanaam siro rathnam,
Krishnam Vande Jagat Gurum. 5

Salutations to the teacher of the world, Krishna,
Who has eyes resembling the fully open lotus flowers,
Who has the blue colour of rich clouds,
And who is the chief gem of the clan of Yadavas.

Rukmani keli samyuktham,
Peethambara shobitham,
Avaptha thulasi gandham,
Krishnam Vande Jagat Gurum. 6

Salutations to the teacher of the world, Krishna,
Who is engaged in playing with Rukmani,
Who shines in yellow silks,
And who is attracted by scent of ocimum.

Gopikaanaam kucha dwandwam,
Kunkumankitha vakshasam,
Sriniketham maheshwasam,
Krishnam Vande Jagat Gurum. 7

Salutations to the teacher of the world, Krishna.
Who is embraced by the two busts of Gopis,
Whose chest has the marks of saffron,
Who lives with Lakshmi and has a big bow.

Sree vathsam mahoraskam,
Vanamala virajitham,
Sanka chakra dharam devam,
Krishnam Vande Jagat Gurum. 8

Salutations to the teacher of the world, Krishna,
Who has the mole Sri Vathsa on his chest and greatly enjoys,
Who is decorated by garlands of forest flowers,
And who holds the conch and the holy wheel.

Krishnashtakamidham punyam,
Prathar uthaya ya padeth,
Koti Janma krutham papam,
Smaranath thasya nasyathi.

If one reads this as soon as he awakes in the morning,
This divine octet of Lord Krishna without fail,
Sins committed in billions of lives,
Would be destroyed, if one thinks about him.


Free Download With Hindhi Lyrics - Mukund Madhav Govind Bol Keshav Madhav Hari Hari Bol And Radhe Krishna Dhuns Sung By Shri Govind Bhargav Ji...

वो धागा ही था जिसने छिपकर पूरा जीवन मोतियों को दे दिया...
और ये मोती अपनी तारीफ पर इतराते रहे उम्र भर...


Free Download Govind Bhargav Ji Bhajan Dhuns Here :-



Mukund Madhav Govind Bol Keshav Madhav Hari Hari Bol Hindi Lyrics :-


बोल हरी बोल हरी हरी हरी बोल,
मुकुंद माधव गोविन्द बोल ।
बोल हरी बोल हरी हरी हरी बोल,
केशव माधव गोविन्द बोल ॥

नाम हरी का जप ले बन्दे,
फिर पीछे पछतायेगा ।

तू कहता है मेरी काया,
काया का घुमान क्या ।
चाँद सा सुन्दर यह तन तेरे,
मिटटी में मिल जाएगा ॥
फिर पीछे पछतायेगा

बाला पन में खेला खाया,
आया जवानी मस्त रहा ।
बूडा पन में रोग सताए,
खाट पड़ा पछतायेगा ॥

वहां से क्या तू लाया बन्दे,
यहाँ से क्या ले जाएगा ।
मुठ्ठी बाँध के आया जग में,
हाथ पसारे जाएगा ॥

जपना है सो जपले बन्दे,
आखिर तो मिट जाएगा ।
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
करनी का फल पायेगा ॥



Album : Main Nahin Makhan Khayo
Artist : Anup Jalota
Genre : International, Religious, Bhajans, Hindu, Indian
Styles : Indian, Indian Classical, Indian Subcontinent Traditions
Label : T-Series
Year : 1999

Free Download Main Nahin Makhan Khayo Album By Anup Jalota :-


1. Aisi laagi lagan meera ho gai magan.mp3
2. Chadariya jhini re jhini.mp3
3. Jag mein sunder hain do naam.mp3
4. Main Nahin Makhan Khayo.mp3

5. Rang de chunariya.mp3
6. Tan Ke Tambure Mein.mp3
7. Wo kala ek baansuri wala.mp3


Download Complete Album :- 
Main Nahin Makkan Khayo (Anup Jalota ).rar

Maiya Mori Main Nahin Makhan Khayo Hindi Lyrics :-


Maiya Mori Main Nahin Makhan Khayo

मैया मोरी, मैं नहीं माखन खायो
कहत सुनत में आकर काहे झूठा दोश लगायो
रि मैया मोरी, मैं नहीं माखन खायो

यमुना के तट पर ग्वाल बन संग चार सहार मैं खेला
गैय्या चरावत बंसी बजावत साँझ की बेला
भूक लगी तो दौड़त दौड़त सीधा मैं घर आयो
मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो ...

न कोई मैं ने मटकी फोड़ी न कोई की है चोरी
जान लिया क्यों मुझको झूठा तूने मैय्य मोरी
अपने अंग को कैसे समझा तूने आज परायो
मैया मोरि मैं नहीं माखन खायो ...

मैं तो बाबा नन्द के लाला, काहे चोर कहाऊँ
अपने घर में कौन कमी जो बाहर माखन खाऊँ
बात सुनी तो माता यशोदा, हँसकर कंठ लगायो
फिर बोली
तू नहीं माखन खायो
रे कृष्णा मोरे, तू नहीं माखन खायो

 श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं में माखन चोरी की लीला सुप्रसिद्ध है। वैसे तो कन्हैया ग्वालिनों के घरों में जा-जाकर माखन चुराकर खाया करते थे। लेकिन आज उन्होंने अपने ही घर में माखन चोरी की और यशोदा ने उन्हें देख भी लिया। इस पद में सूरदास ने श्रीकृष्ण के वाक्चातुर्य का जिस प्रकार वर्णन किया है वैसा अन्यत्र नहीं मिलता। 
जब यशोदा ने देख लिया कि कान्हा ने माखन खाया है तो पूछ ही लिया कि क्यों रे कान्हा! तूने माखन खाया है क्या? तब श्रीकृष्ण अपना पक्ष किस तरह मैया के समक्ष प्रस्तुत करते हैं, यही इस पद की विशिष्टता है। कन्हैया बोले.. मैया! मैंने माखन नहीं खाया है। मुझे तो ऐसा लगता है कि इन ग्वाल-बालों ने ही बलात् मेरे मुख पर माखन लगा दिया है। फिर बोले कि मैया तू ही सोच, तूने यह छींका किना ऊंचा लटका रखा है और मेरे हाथ कितने छोटे-छोटे हैं। इन छोटे हाथों से मैं कैसे छींके को उतार सकता हूँ। कन्हैया ने मुख से लिपटा माखन पोंछा और एक दोना जिसमें माखन बचा रह गया था उसे पीछे छिपा लिया। कन्हैया की इस चतुराई को देखकर यशोदा मन ही मन मुस्कराने लगीं और छड़ी फेंककर कन्हैया को गले से लगा लिया। सूरदास कहते हैं कि यशोदा को जिस सुख की प्राप्ति हुई वह सुख शिव व ब्रह्मा को भी दुर्लभ है। श्रीकृष्ण (भगवान् विष्णु) ने बाल लीलाओं के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि भक्ति का प्रभाव कितना महत्त्वपूर्ण है।



Free Download And Listen Gopi Geet With Hindi Meaning Or Lyrics With Bhajans Sung By 
Shri Radhakrishnaji Maharaj ( Jodhpur Wale )

मेने माला बनाई रे कृष्ण नाम की, कृष्ण नाम की रे गोपाल नाम की....
मेरे नैनो में गोकुल वृन्दावन, मेरे प्राणो में मोहन मनभावन....
मेरे होटों पे कृष्ण मेरे ह्रदय में कृष्ण, ओ मेने ज्योति जगाई रे कृष्ण नाम की...

Gopi Geet (Gopi Gita) is part of Srimad Bhagavat. It is contained in the first half of book ten, chapter 31, verses 1 to 19 of Bhagavat Purana.

In these nineteen tender verses, Gopis, female consort of Lord Krishna, narrates his glory at the time of his disappearance during the Rāsa play. Sri Krishna planned Rāsa lilā (Rāsa -a popular dance carried out by men and women together in circle and lilā - a divine play) to lift Gopis' to a higher spiritual state. However, Lord Krishna was perturbed by the introvert pursuit of Gopis and in order to teach them a lesson, he disappeared deep into the forest.

When Gopis did not find Krishna, they became breathless. Bemused Gopis' looked all over, but in vain. Then, with their body, mind and soul in unison with Krishna's memories, they arrived at the banks of river Yamuna. Immersed in his unfathomable love and earnestly longing for his heavenly vision, Gopis' started singing the glory of his divine grace and the very tunes became known as Gopi Geet - cries for Krishna.

"O beloved! please reveal Yourself and see how your sweethearts, who have centered their life around you, are longing for you... You have saved us time and again from death through poisonous water, from the clutches of demon disguised as a snake and in the form of a calf, from showers and storm, from strokes of lightning, from all sort of menaces... We believe that You are not merely son of a cowherd woman but essence of all embodied souls... You have manifested for the protection of the universe... O beloved, Our mind grows uneasy thinking about your lotus-feet getting pricked with blades of grass and sprouts when You go out pasturing the cattle... Our minds are infatuated and we are longing to be one with You. Please appear before us."

Free Download Gopi Geet And Bhajans By Shri Radhakrishnaji Maharaj :-


Gopi Geet Lyrics Download Here.pdf

Gopi Geet Hindi Lyrics And Meaning :-


Gopi Geet Hindi Lyrics And Translations

जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः श्रयत इन्दिरा शश्वदत्र हि ।
दयित दृश्यतां दिक्षु तावका स्त्वयि धृतासवस्त्वां विचिन्वते ॥1॥

(हे प्यारे ! तुम्हारे जन्म के कारण वैकुण्ठ आदि लोकों से भी व्रज की महिमा बढ गयी है। तभी तो सौन्दर्य और मृदुलता की देवी लक्ष्मीजी अपना निवास स्थान वैकुण्ठ छोड़कर यहाँ नित्य निरंतर निवास करने लगी है , इसकी सेवा करने लगी है। परन्तु हे प्रियतम ! देखो तुम्हारी गोपियाँ जिन्होंने तुम्हारे चरणों में ही अपने प्राण समर्पित कर रखे हैं , वन वन भटककर तुम्हें ढूंढ़ रही हैं।।)

शरदुदाशये साधुजातसत्सरसिजोदरश्रीमुषा दृशा ।
सुरतनाथ तेऽशुल्कदासिका वरद निघ्नतो नेह किं वधः ॥2॥

(हे हमारे प्रेम पूर्ण ह्रदय के स्वामी ! हम तुम्हारी बिना मोल की दासी हैं। तुम शरदऋतु के सुन्दर जलाशय में से चाँदनी की छटा के सौन्दर्य को चुराने वाले नेत्रों से हमें घायल कर चुके हो । हे हमारे मनोरथ पूर्ण करने वाले प्राणेश्वर ! क्या नेत्रों से मारना वध नहीं है? अस्त्रों से ह्त्या करना ही वध है।।)

विषजलाप्ययाद्व्यालराक्षसाद्वर्षमारुताद्वैद्युतानलात् ।
वृषमयात्मजाद्विश्वतोभया दृषभ ते वयं रक्षिता मुहुः ॥3॥

(हे पुरुष शिरोमणि ! यमुनाजी के विषैले जल से होने वाली मृत्यु , अजगर के रूप में खाने वाली मृत्यु अघासुर , इन्द्र की वर्षा , आंधी , बिजली, दावानल , वृषभासुर और व्योमासुर आदि से एवम भिन्न भिन्न अवसरों पर सब प्रकार के भयों से तुमने बार- बार हम लोगों की रक्षा की है।)

न खलु गोपिकानन्दनो भवानखिलदेहिनामन्तरात्मदृक् ।
विखनसार्थितो विश्वगुप्तये सख उदेयिवान्सात्वतां कुले ॥4॥

(हे परम सखा ! तुम केवल यशोदा के ही पुत्र नहीं हो; समस्त शरीरधारियों के ह्रदय में रहने वाले उनके साक्षी हो,अन्तर्यामी हो । ! ब्रह्मा जी की प्रार्थना से विश्व की रक्षा करने के लिए तुम यदुवंश में अवतीर्ण हुए हो।।)

विरचिताभयं वृष्णिधुर्य ते चरणमीयुषां संसृतेर्भयात् ।
करसरोरुहं कान्त कामदं शिरसि धेहि नः श्रीकरग्रहम् ॥5॥

(हे यदुवंश शिरोमणि ! तुम अपने प्रेमियों की अभिलाषा पूर्ण करने वालों में सबसे आगे हो । जो लोग जन्म-मृत्यु रूप संसार के चक्कर से डरकर तुम्हारे चरणों की शरण ग्रहण करते हैं, उन्हें तुम्हारे कर कमल अपनी छत्र छाया में लेकर अभय कर देते हैं । हे हमारे प्रियतम ! सबकी लालसा-अभिलाषाओ को पूर्ण करने वाला वही करकमल, जिससे तुमने लक्ष्मीजी का हाथ पकड़ा है, हमारे सिर पर रख दो।।)

व्रजजनार्तिहन्वीर योषितां निजजनस्मयध्वंसनस्मित ।
भज सखे भवत्किंकरीः स्म नो जलरुहाननं चारु दर्शय ॥6॥

(हे वीर शिरोमणि श्यामसुंदर ! तुम सभी व्रजवासियों का दुःख दूर करने वाले हो । तुम्हारी मंद मंद मुस्कान की एक एक झलक ही तुम्हारे प्रेमी जनों के सारे मान-मद को चूर-चूर कर देने के लिए पर्याप्त हैं । हे हमारे प्यारे सखा ! हमसे रूठो मत, प्रेम करो । हम तो तुम्हारी दासी हैं, तुम्हारे चरणों पर न्योछावर हैं । हम अबलाओं को अपना वह परमसुन्दर सांवला मुखकमल दिखलाओ।।)

प्रणतदेहिनांपापकर्शनं तृणचरानुगं श्रीनिकेतनम् ।
फणिफणार्पितं ते पदांबुजं कृणु कुचेषु नः कृन्धि हृच्छयम् ॥7॥

(तुम्हारे चरणकमल शरणागत प्राणियों के सारे पापों को नष्ट कर देते हैं। वे समस्त सौन्दर्य, माधुर्यकी खान है और स्वयं लक्ष्मी जी उनकी सेवा करती रहती हैं । तुम उन्हीं चरणों से हमारे बछड़ों के पीछे-पीछे चलते हो और हमारे लिए उन्हें सांप के फणों तक पर रखने में भी तुमने संकोच नहीं किया । हमारा ह्रदय तुम्हारी विरह व्यथा की आग से जल रहा है तुम्हारी मिलन की आकांक्षा हमें सता रही है । तुम अपने वे ही चरण हमारे वक्ष स्थल पर रखकर हमारे ह्रदय की ज्वाला शांत कर दो।।) 

गिरा वल्गुवाक्यया बुधमनोज्ञया पुष्करेक्षण ।
वीर मुह्यतीरधरसीधुनाऽऽप्याययस्व नः ॥8॥

(हे कमल नयन ! तुम्हारी वाणी कितनी मधुर है । तुम्हारा एक एक शब्द हमारे लिए अमृत से बढकर मधुर है । बड़े बड़े विद्वान उसमे रम जाते हैं । उसपर अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं । तुम्हारी उसी वाणी का रसास्वादन करके तुम्हारी आज्ञाकारिणी दासी गोपियाँ मोहित हो रही हैं । हे दानवीर ! अब तुम अपना दिव्य अमृत से भी मधुर अधर-रस पिलाकर हमें जीवन-दान दो, छका दो।।)

तव कथामृतं तप्तजीवनं कविभिरीडितं कल्मषापहम् ।
श्रवणमङ्गलं श्रीमदाततं भुवि गृणन्ति ते भूरिदा जनाः ॥9॥

(हे प्रभो ! तुम्हारी लीला कथा भी अमृत स्वरूप है । विरह से सताए हुये लोगों के लिए तो वह सर्वस्व जीवन ही है। बड़े बड़े ज्ञानी महात्माओं - भक्तकवियों ने उसका गान किया है, वह सारे पाप - ताप तो मिटाती ही है, साथ ही श्रवण मात्र से परम मंगल - परम कल्याण का दान भी करती है । वह परम सुन्दर, परम मधुर और बहुत विस्तृत भी है । जो तुम्हारी उस लीलाकथा का गान करते हैं, वास्तव में भू-लोक में वे ही सबसे बड़े दाता हैं।।) 

प्रहसितं प्रिय प्रेमवीक्षणं विहरणं च ते ध्यानमङ्गलम् ।
रहसि संविदो या हृदिस्पृशः कुहक नो मनः क्षोभयन्ति हि ॥10॥

(हे प्यारे ! एक दिन वह था , जब तुम्हारे प्रेम भरी हंसी और चितवन तथा तुम्हारी तरह तरह की क्रीडाओं का ध्यान करके हम आनंद में मग्न हो जाया करती थी । उनका ध्यान भी परम मंगलदायक है , उसके बाद तुम मिले । तुमने एकांत में ह्रदय-स्पर्शी ठिठोलियाँ की, प्रेम की बातें कहीं । हे छलिया ! अब वे सब बातें याद आकर हमारे मन को क्षुब्ध कर देती हैं।।)

चलसि यद्व्रजाच्चारयन्पशून् नलिनसुन्दरं नाथ ते पदम् ।
शिलतृणाङ्कुरैः सीदतीति नः कलिलतां मनः कान्त गच्छति ॥11॥

(हे हमारे प्यारे स्वामी ! हे प्रियतम ! तुम्हारे चरण, कमल से भी सुकोमल और सुन्दर हैं । जब तुम गौओं को चराने के लिये व्रज से निकलते हो तब यह सोचकर कि तुम्हारे वे युगल चरण कंकड़, तिनके, कुश एंव कांटे चुभ जाने से कष्ट पाते होंगे; हमारा मन बेचैन होजाता है । हमें बड़ा दुःख होता है।।)

दिनपरिक्षये नीलकुन्तलैर्वनरुहाननं बिभ्रदावृतम् ।
घनरजस्वलं दर्शयन्मुहुर्मनसि नः स्मरं वीर यच्छसि ॥12॥

(हे हमारे वीर प्रियतम ! दिन ढलने पर जब तुम वन से घर लौटते हो तो हम देखतीं हैं की तुम्हारे मुख कमल पर नीली नीली अलकें लटक रही हैं और गौओं के खुर से उड़ उड़कर घनी धुल पड़ी हुई है । तुम अपना वह मनोहारी सौन्दर्य हमें दिखा दिखाकर हमारे ह्रदय में मिलन की आकांक्षा उत्पन्न करते हो।।)

प्रणतकामदं पद्मजार्चितं धरणिमण्डनं ध्येयमापदि ।
चरणपङ्कजं शंतमं च ते रमण नः स्तनेष्वर्पयाधिहन् ॥13॥

(हे प्रियतम ! एकमात्र तुम्हीं हमारे सारे दुखों को मिटाने वाले हो । तुम्हारे चरण कमल शरणागत भक्तों की समस्त अभिलाषाओं को पूर्ण करने वाले है । स्वयं लक्ष्मी जी उनकी सेवा करती हैं । और पृथ्वी के तो वे भूषण ही हैं । आपत्ति के समय एकमात्र उन्हीं का चिंतन करना उचित है जिससे सारी आपत्तियां कट जाती हैं । हे कुंजबिहारी ! तुम अपने उन परम कल्याण स्वरूप चरण हमारे वक्षस्थल पर रखकर हमारे ह्रदय की व्यथा शांत कर दो।।)

सुरतवर्धनं शोकनाशनं स्वरितवेणुना सुष्ठु चुम्बितम् ।
इतररागविस्मारणं नृणां वितर वीर नस्तेऽधरामृतम् ॥14॥

(हे वीर शिरोमणि ! तुम्हारा अधरामृत मिलन के सुख को को बढ़ाने वाला है । वह विरहजन्य समस्त शोक संताप को नष्ट कर देता है । यह गाने वाली बांसुरी भलीभांति उसे चूमती रहती है । जिन्होंने उसे एक बार पी लिया, उन लोगों को फिर अन्य सारी आसक्तियों का स्मरण भी नहीं होता । अपना वही अधरामृत हमें पिलाओ।।)

अटति यद्भवानह्नि काननं त्रुटिर्युगायते त्वामपश्यताम् ।
कुटिलकुन्तलं श्रीमुखं च ते जड उदीक्षतां पक्ष्मकृद्दृशाम् ॥15॥

(हे प्यारे ! दिन के समय जब तुम वन में विहार करने के लिए चले जाते हो, तब तुम्हें देखे बिना हमारे लिए एक एक क्षण युग के समान हो जाता है और जब तुम संध्या के समय लौटते हो तथा घुंघराली अलकों से युक्त तुम्हारा परम सुन्दर मुखारविंद हम देखती हैं, उस समय पलकों का गिरना भी हमारे लिए अत्यंत कष्टकारी हो जाता है और ऐसा जान पड़ता है की इन पलकों को बनाने वाला विधाता मूर्ख है।।)

पतिसुतान्वयभ्रातृबान्धवानतिविलङ्घ्य तेऽन्त्यच्युतागताः ।
गतिविदस्तवोद्गीतमोहिताः कितव योषितः कस्त्यजेन्निशि ॥16॥

(हे हमारे प्यारे श्याम सुन्दर ! हम अपने पति-पुत्र, भाई -बन्धु, और कुल परिवार का त्यागकर, उनकी इच्छा और आज्ञाओं का उल्लंघन करके तुम्हारे पास आयी हैं । हम तुम्हारी हर चाल को जानती हैं, हर संकेत समझती हैं और तुम्हारे मधुर गान से मोहित होकर यहाँ आयी हैं । हे कपटी ! इस प्रकार रात्रि के समय आयी हुई युवतियों को तुम्हारे सिवा और कौन छोड़ सकता है।।)

रहसि संविदं हृच्छयोदयं प्रहसिताननं प्रेमवीक्षणम् ।
बृहदुरः श्रियो वीक्ष्य धाम ते मुहुरतिस्पृहा मुह्यते मनः ॥17॥

(हे प्यारे ! एकांत में तुम मिलन की इच्छा और प्रेम-भाव जगाने वाली बातें किया करते थे । ठिठोली करके हमें छेड़ते थे । तुम प्रेम भरी चितवन से हमारी ओर देखकर मुस्कुरा देते थे और हम तुम्हारा वह विशाल वक्ष:स्थल देखती थीं जिस पर लक्ष्मी जी नित्य निरंतर निवास करती हैं । हे प्रिये ! तबसे अब तक निरंतर हमारी लालसा बढ़ती ही जा रही है और हमारा मन तुम्हारे प्रति अत्यंत आसक्त होता जा रहा है।।)

व्रजवनौकसां व्यक्तिरङ्ग ते वृजिनहन्त्र्यलं विश्वमङ्गलम् ।
त्यज मनाक् च नस्त्वत्स्पृहात्मनां स्वजनहृद्रुजां यन्निषूदनम् ॥18॥

(हे प्यारे ! तुम्हारी यह अभिव्यक्ति व्रज-वनवासियों के सम्पूर्ण दुःख ताप को नष्ट करने वाली और विश्व का पूर्ण मंगल करने के लिए है । हमारा ह्रदय तुम्हारे प्रति लालसा से भर रहा है । कुछ थोड़ी सी ऐसी औषधि प्रदान करो, जो तुम्हारे निज जनो के ह्रदय रोग को सर्वथा निर्मूल कर दे।।)

यत्ते सुजातचरणाम्बुरुहं स्तनेष भीताः शनैः प्रिय दधीमहि कर्कशेषु ।
तेनाटवीमटसि तद्व्यथते न किंस्वित् कूर्पादिभिर्भ्रमति धीर्भवदायुषां नः ॥19॥

(हे श्रीकृष्ण ! तुम्हारे चरण, कमल से भी कोमल हैं । उन्हें हम अपने कठोर स्तनों पर भी डरते डरते रखती हैं कि कहीं उन्हें चोट न लग जाय । उन्हीं चरणों से तुम रात्रि के समय घोर जंगल में छिपे-छिपे भटक रहे हो । क्या कंकड़, पत्थर, काँटे आदि की चोट लगने से उनमे पीड़ा नहीं होती ? हमें तो इसकी कल्पना मात्र से ही चक्कर आ रहा है । हम अचेत होती जा रही हैं । हे प्यारे श्यामसुन्दर ! हे प्राणनाथ ! हमारा जीवन तुम्हारे लिए है, हम तुम्हारे लिए जी रही हैं, हम सिर्फ तुम्हारी हैं।।


Mridul Gaurav krishna Ji

Enjoy, Download Shri Mridul Krishan Goswami Ji And Shri Gaurav Krishna Goswami Ji Maharaj Mp3 Bhajans With Hindi Lyrics

मेरा तार प्रभु से जोड़े, मेरे मन का रास्ता मोड़े....
भटकत भटकत पथ नहीं मिलता, मन मेरा रोके नहीं रूकता...
ओ मेरे मन के भ्रम को तोड़े, ऐसा कोई संत मिले....

Free Download Mridul Gaurav Krishna Ji Maharaj Mp3 Bhajans :-



4. Agar Shayam Sunder Ka + Mera Saanwara Mujhe Mil Gaya Gaurav Krishna Ji.mp3

5. Aisa Koi Sant Mile + Wah Wah Re Mouj Fakira Di Gaurav Ji.mp3

6. Anupam Madhuri Jodi By Mridul Krishna Ji.mp3

7. Banke Bihari Ji Tose Hi Naina Mere Lage By Shri Mridul Krishna Ji Maharaj.mp3

8. Banke bihari ji tose hi nainanmore by mridul ji.mp3

9. Banke Bihari Mere Girdhari By Gaurav Ji.mp3

10. Banke Bihari Mujhko Dena Sahara By Gaurav Krishna Ji.mp3


Anupama Madhuri Jodi Hamare Syama Syama Ki :-


Anupama Madhuri Jodi Hamare Syama Syama Ki

अनुपम माधुरी जोड़ी, हमारे श्याम श्यामा की,
रसीली मद भरी मस्‍ती, हमारे श्याम श्यामा की ॥

कटीली भौंह, अदा बाँकी, सुघड़ सूरत, मधुर बतिया,
लटक गरदन की मन बसिया, हमारे श्याम श्यामा की ॥

परस्पर मिलके जब विहरें, श्री वृन्दाावन के कुँजन में,
नहीं वर्णत बने शोभा, हमारे श्याम श्यामा की ॥

मुकुट और चंद्रिका माथे, अधर पर पान की लाली,
अहो कैसी बनी छबि है, हमारे श्याम श्यामा की ॥

नहीं कछु लालसा मन में, नहीं निर्वाण की इच्छा,
सखी स्यामा मिले सेवा, हमारे श्याम श्यामा की ॥



Album : All One
Artist : Krishna Das
Year : 2005
Genre : International, New Age
Styles : Ethnic Fusion, Worldbeat, Healing, Indian, Indian Subcontinent Traditions, Meditation/Relaxation, Relaxation, Spiritual

Kirtan can be as simple, on the one hand, as two people alone in a room, singing the Divine Name back and forth to each other. On the other hand, it can be a complex big band of 70 singers and 18 musicians! 

This 50-plus-minute, in-depth exploration of the Hare Krishna mantra starts off on the simpler side, with Krishna Das’ slow, richly-textured chanting, the drone of his harmonium, a touch of Steve Gorn’s bansuri flute and Elaine Kreston’s cello, and the responses of the Ever-Changing Kosmic Kirtan Posse. The other musicians waiting in the wings, including Steely Dan’s Walter Becker (bass) and Def Leppard’s Rick Allen (drums), then step forward, sit down, and turn up the volume, when this pensive melody spreads its wings wide and takes off. Largely recorded in single takes at New York’s Avatar Studios over three days in November, 2004, All One is a mantric suite in four movements: the simple opening instrumentation, with Ty Burhoe joining in on tabla; the second movement, a sort of Western classical section, with John McDowell’s piano grounding the increasing musical intensity; the third track, which drops back down briefly for a restful moment with David Nichtern’s guitar before opening up into a rock-and-roll ride; and the final movement, kicking in with “Radhe” to a dance party of South African township jive, trumpet and all. 

But the heartbeat at the center of it all isn’t, in the end, the pulse of the drums or the soaring guitars. It’s the Hare Krishna mantra itself, and the palpable devotion in their voices as Krishna Das and the posse take turns sending it back and forth—singing and listening, singing and listening to the Divine Name. 20-piece band or not, this is what it comes down to. And that’s as simple as it gets. 

Free Download All One Kritan Album By Krishna Das :-



04- Township_Krishna.mp3


Calling From Afar Lyrics :-


Krishna Das

Hare Krishna
Hare Krishna
Krishna Krishna
Hare Hare

Hare Raama
Hare Raama
Raama Raama
Hare Hare



Album : Daras
Singer : Madan Gopal
Genres: World, Music
Year : 2002
Label : Advanced Audio Productions

फिर जख्म महके फिर यादों की रुत आई,
आज तो पैमाने में भी तेरी सूरत नजर आई !

Free Download Sant Kabir Das Ji Bhajans By Madan Gopal Ji :- 


1. Aaj Din Ke Main Jaaun.MP3

2. Ab Main Ram Ke Gun Gau.MP3

3. Akhiyaan Hari Darshan.MP3

4. Barsan Lagyo Rang.MP3

5. Ho Gaye Darshan Tumhare.MP3

6. Pyare Darshan Dijiyo Aye.MP3

7. Tera Mera Manua.MP3

8. Tum Sharanai Aayo Thakur.MP3


Akhiyan Hari Darshan Ko Pyaasi Hindi Lyrics :-


Akhiyan Hari Darshan Ko Pyaasi

हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी 
देख्यो चाहे कमल नयन को निस दिन रहत उदासी 
अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ........

केसर तिलक मोतिन की माल वृंदावना के वासी 
नेह लगाईं त्याग गएँ त्रिन सम डाल गए गल फँसी 
अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ........

काहू के मन की को जानत लोगन के मन हासी 
सूरदास प्रभु तुम्हारे दरस बिन लेहो करवट काशी अँखियाँ
हरी दर्शन की प्यासी, अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी....



Album : Mridul Pushpanjali, Vol. 2 (Live)
Singer : Mridul Krishna And Gaurav Krishna Shastri Ji Maharaj
Year : 2013
Label : Moxx Music Pvt. Ltd.
Genre : Bhajan

अनुपम सुन्दर नदकिशोरा मनमोहन घनश्याम,
बाँकेबिहारी कुँजबिहारी कमल नयन अभिराम.....
मुरलीमाधव राधेगोविंदा मधुसूधन घनश्याम,
अनुपम सुन्दर नदकिशोरा मनमोहन घनश्याम,

Free Download Mridul Pushpanjali, Vol. 2 (Live) Bhajan Album :-




रे मन कृष्ण नाम कह लीजे।
गुरु के बचन अटल कर मानो संत समागम कीजे।।
पढिये सुनिए भक्ति भागवत और कहा कथि कीजे।
कृष्ण नाम बिन जनम बाद है बृथा काहे जीजे।
कृष्ण नाम रस ब्रहो जात है तृषावंत होए पीजे।।
सूरदास हरि शरण ताकिये जनम सफल कर लीजे।।



Enjoy A Collection Of  EXCLUSIVE Live Bhajans Sung Together By Mridul Krishna Shastri Ji Maharaj, Gaurav Krishna Ji Maharaj

Album : Mridul Pushpanjali, Vol. 1 (Live)
Singer : Mridul Krishna Shastri Ji Maharaj, Gaurav Krishna Ji
Genres : Devotional & Spiritual, Music, Indian
Year : 2013
Label : Moxx Music Pvt. Ltd.

श्याम तेरी बंशी बजे धीरे-धीरे, बजे धीरे-धीरे वो यमुना के तीरे...
इत में ललिता उत में विशाखा, बीच में राधे चले धीरे धीरे.... 

Free Download Mridul Gaurav Ji Live Bhajans :- 




Sachhe Na Sahi Jhute Hi Sahi Hindi Lyrics :-


Sachhe Na Sahi Jhute Hi Sahi Aakhir To Tere Deewane Hain

सच्चे ना सही झुटे ही सही, 
आखिर तो तेरे दीवाने है..

पहले तो बनाया था अपना,
फिर मुखड़ा कैसे मोड़ लिया....

लायक ना सही जाहिल ही सही,
आखिर तो तेरे दीवाने है..

बेताब ना कर बर्बाद ना कर,
हैरान ना कर अपनी रहमत से...

दाना ना सही नादाँ ही सही,
आखिर तो तेरे दीवाने है..

पहले भी अधम तो तारा है,
फिर मुझको कैसे छोड़ दिया..?

साधक ना सही सेवक ही सही,
आखिर तो तेरे दीवाने है..

तुम आये नहीं ओ श्याम सुन्दर,
हम याद में जीते मरते है....

हँसते ना सही रोते ही सही,
आखिर तो तेरे दीवाने है..