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Mohe To Pyari Laago Barsaane Ki Galiyan Sung By Shri Govind Bhargav Ji.....

मीठा सा नशा शुरूर इसमें है,
ये हद्दे लताफत से गुजरती ही नही,
जो जाम से पीते है उतर जाती है,
हम नाम से पीते है उतरती ही नही....


Free Download Shri Govind Bhargav Ji Bhajans :-


1. Kunj Bihari By Govind Bhargav.mp3

2. Laadli Ab Man Hamara -by Govind Bhargav Ji.mp3

3. Mare Ghar Aaviji Pritam Pyare - Govind Bhargav Ji.mp3

4. Mohe Na Bisaro Mein Jan Tera, Krishna Bhajan by Shri Govind Bhargav Ji.mp3

5. MOHE TO PYARI LAAGE BARSANE.mp3


Ladli Adbut Nazara Tere Barsane Me Hai Hindi Lyrics :-


Ladli Adbut Nazara Tere Barsane Me Hai

लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में है।
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
बेसहारों को सहारा तेरे बरसाने में है ॥

झांकीया तेरे महल की कर रहे सब देवगण।
आगया बैकुंठ सारा तेरे बरसाने में है॥

हर लता हर पात में है तेरी दया की वो झलक।
हर घडी यशोमती दुलारा तेरे बरसाना में है॥

अब कहाँ जाऊं किशोरी तेरे दर को छोड़ कर।
मेरे जीवन का सहारा तेरे बरसाने में है॥

यूँ तो सारे बृज में ही है तेरी लीला का प्रताप।
पर अनोखा ही नज़ारा, तेरे बरसाने में है ॥

मैं भला हूँ या बुरा हूँ पर तुम्हारा हूँ सदा।
अब तो जीवन का किनारा तेरे बरसाने में है॥



Jadu Bhari Teri Ankhe Jidhar Gayi Ghaayal Karke Jigar Mein Utar Gayi.....With Some Other Bhajans Sung By Shri Mridul Krishna Ji And Gaurav Krishna Ji Maharaj...

यमुना जी का तट हो, माथे पे मुकुट हो...
अधर मुरली हो, चेहरे पे हँशी हो...
खड़े होंगे आप इस बांकी अदा से....
मुकुट झुक रहा होगा, मौज-ऐ-हवा से....
अगर इस तरह होगा अंजाम मेरा....
तो तेरा नाम होगा और काम मेरा.....

Free Download Mridul Gaurav Krishna Ji Banke Bihari Bhajans :-



6. Jadoogar Sayya Mera Dil Loot Le Gya By Gaurav Krishna Ji.mp3

7. Jai Jai Bholenath + Shankar Damruwala By Gaurav Krishna Ji.mp3

8. Jai Jai Govind Govind Gopal Hari By Gaurav Krishna Ji.mp3

9. Jai Madhav Madan Murari Radhe Shya Shyama Shyam By Mridul Krishna Ji.mp3

10. Jai Nandnandan Jai Ghanshyam By Gaurav Krishna Ji.mp3


Jadu Bhari Teri Ankhe Jidhar Gayi Hindi Lyrics :-


Jadu Bhari Teri Ankhe Jidhar Gayi

जादू भरी तेरी आँखे जिधर गयी 
घायल करके जिगर में उतर गयी...
अब पल पलक टरत नहीं टारे
छीन छोरत मनु जान निकल गयी...
घायल करके जिगर में उतर गयी.....

ओ निरख छठा घनघोर घठा,
भावना सी उमड़ गयी....
घायल करके जिगर में उतर गयी...
जादू भरी तेरी आँखे जिधर गयी.....

हँसना तो उन्हां दी आदत सी, 
असि गलत अंदाज़ा ला बैठे,
वो हँसते हँसते वसदे रहे,
हम अपना आप गावं बैठे....

में तुझे देखू तू मुझे देख, 
और देखते देखते हो जाये एक...

अब पल पलक तरक नहीं तारे,
छिन छोरत मनु जान निकल गयी...
घायल करके जिगर में उतर गयी...
जादू भरी तेरी आँखे जिधर गयी.....

लाली मेरे यार की जित्त देखूँ तित लाल,
और लाली देखण में चली में भी हो गई लाल....
जादू भरी तेरी आँखे जिधर गयी 
घायल करके जिगर में उतर गयी...

जब से उन आँखों से आँखे मिली, 
हो गयी है तभी से ये बावरी आँखे.....

नहीं धीरज धरे अति व्याकुल है, 
ऊप जाती है ये फुलकावरी आँखे....

कुछ जादू भरी कुछ भाव भरी, 
उस सावंरे की है वो सावँरी आँखे...

फिर से वही रूप दिखादे कोई, 
हो रही है बड़ी ही उतावरी आँखे...

जादू भरी तेरी आँखे जिधर गयी 
घायल करके जिगर में उतर गयी...

नैन कटारी बारी बारी पलकन मारी,
ओ जादू की पिटारी जिया छुईमुई कर गयी....
घायल करके जिगर में उतर गयी...
जादू भरी तेरी आँखे जिधर गयी 



Krishna (TV series)

Krishna (also called Shri Krishna) is an Indian television series created, written, and directed by Ramanand Sagar. The series originally aired weekly on Doordarshan. It is an adaptation of the stories of the life of Krishna. Shri Krishna was first broadcast on Doordarshan's Metro Channel (DD 2) from 1993.In 1996, the DD Metro broadcast was discontinued and the show was broadcast from the beginning on DD National. In 1999, the show moved to Zee where the remaining episodes were broadcast.

The show was based on Bhagavat Puran, Brahma Vaivart, HariVamsa, Vishnu Puran, Padma Puran, Garga Samhita, Bhagavad Gita & Mahabharat.

Enjoy Complete Srimad Bhagavad Gita From Sri Krishna TV Series in Mp3 Fomat....

मोहन नैना आपके नौका के आकार,
जो जन इनमें बस गये हो गये भव से पार....

Free Download Srimad Bhagavad Gita in Mp3 :-


1. Shrimad Bhagavad Gita NEW1.mp3

2. Shrimad Bhagavad Gita NEW2.mp3


श्रीमद भगवदगीता

हे पाण्डव! सब कर्मो के मेरे लिए करना, मेरे ही परायण होना, आसक्ति रहित होना, और अन्य किसी प्राणी के साथ वैर न करना-ऐसी भक्ति से युक्त भक्त मेरे को ही प्राप्त होता है।
श्री मद भगवदगीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन को मुलत: ज्ञान योग, कर्म योग, भक्ति योग की शिक्षा दी। ज्ञान के विषय में उनका कहना है।
‘‘ नहि ज्ञानेन सदृश पवित्रमिह विद्यते ‘‘
इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र अन्य कुछ भी नहीं जान पडता। ज्ञानियों के लिए वो सम्मान प्रकट करते हुए कहते है ‘‘ज्ञानी तो साक्षात मेरा स्वरूप है।
‘‘ ज्ञानी त्वात्मैव मे मतम्’’
जब-जब इस भी ज्ञान योग का लोप इस धरती पर होता है तथा तरह-तरह के पाखंड धर्म के रूप में स्वीकार किए जाते है ‘‘ श्री कृष्ण का संदेश गूंज उठता है।
‘‘अर्जुन! मैंने इस पवित्र ज्ञान योग की सूर्य को दीक्षा दी, फिर यह पीढी दर पीढी चलता हुआ मनु से इक्ष्वाकु और उससे राज ऋषियों ने सीखा। फिर यह संसार से लुप्त हो गया। इस शाश्वत योग को पु:न स्थापित करना था इसलिए मुझे आना पड़ा।
जो व्यक्ति उगते हुए सूर्य का ध्यान आज्ञाचक्र पर करेगें वो इस ज्ञान के अधिकारी बन सकते है परन्तु प्रारम्भ में चौबीस मिनट से अधिक न करें। इसलिए शास्त्रों में सविता देवता को गुरू तुल्य माना गया है। जिनकें कोई गुरू न हो, सविता को अपना गुरू मानें। समय आने पर परमात्मा स्वत: जीवात्मा को उसके गुरू से मिला देता है। गुरू धारण करने में अधीरता दिखाना समझदारी नहीं है। पवन सुत हनुमान जी ने सविता देवता को गुरू बनाकर सम्पूर्ण ब्रहमाण्ड का ज्ञान विज्ञान एवं ऋद्धि-सिद्धियों को प्राप्त कर लिया था।
परन्तु ज्ञानी को भी दृढता पूर्वक कर्म के नियम का पालन करना होता है जिससे जनसमान्य उनसे प्रेरणा लेकर आल्सय और भ्रम की स्थिति में न जा फसें। क्योंकि यदि महान व्यक्तियों के द्वारा यदि आदर्शो की स्थापना के लिए कर्म नहीं किया गया तो जन सामान्य का कोई मार्गदर्शक न हो पाएगा और वो इन्द्रिय सुखों के सुलभ मार्ग में भटक जाँएगें।
कर्म किस प्रकार करे भगवान का आदेश है यज्ञार्थ कर्म करों। जो कर्म परिणाम में बंधनदायक नहीं है, उन्हें यज्ञ कहा जाता है। अन्य सब कर्म बन्धनकारी है। हे अर्जुन! सब मोह छोड़कर, प्रत्येक कार्य को भगवान को समर्पित करते हुए लोकहित के लिए करो। यहीं कर्म योग है।



Enjoy Songs, Kirtan, Bhajans Sung By Satyaa, Pari And Mira

Genre : New Age
Artist : Mira, Satyaa & Pari

मोहन नैना आपके नौका के आकार,
जो जन इनमें बस गये हो गये भव से पार...

Free Download Satyaa, Pari And Mira Bhajans Here :-


1. 121 (One to One) - Satyaa, Pari & Mira.mp3

2. Aham Brahmasmi.mp3

3. Hara-hara-shankara.mp3

4.  Hari-om.mp3

5. Jai Durgen Jagatambe - Satyaa & Pari.mp3

6. OM NAMO SHIVAYA.mp3

7. Om-arunachala.mp3

8. Padma Lakshmi.mp3


जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाये तरुवर कि छाया
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है
मैं जबसे शरण तेरी आया, मेरे राम

भटका हुआ मेरा मन था कोई
मिल ना रहा था सहारा
लहरों से लड़ती हुई नाव को
जैसे मिल ना रहा हो किनारा, मिल ना रहा हो किनारा
उस लड़खड़ाती हुई नाव को जो
किसी ने किनारा दिखाया
ऐसा ही सुख ...

शीतल बने आग चंदन के जैसी
राघव कृपा हो जो तेरी
उजियाली पूनम की हो जाएं रातें
जो थीं अमावस अंधेरी, जो थीं अमावस अंधेरी
युग- युग से प्यासी मरुभूमि ने
जैसे सावन का संदेस पाया
ऐसा ही सुख ...

जिस राह की मंज़िल तेरा मिलन हो
उस पर कदम मैं बढ़ाऊं
फूलों में खारों में, पतझड़ बहारों में
मैं न कभी डगमगाऊं, मैं न कभी डगमगाऊं
पानी के प्यासे को तक़दीर ने
जैसे जी भर के अमृत पिलाया
ऐसा ही सुख ...