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Pujya Bhaishri Rameshbhai Oza, lovingly addressed as ‘Bhaishri’, has dedicated his life to disseminating the divine teachings of the scriptures to thousands of listeners around the world. He is also a guide and mentor to the hundreds of students at Sandipani Vidyaniketan, Gujarat.
Bhaishri identifies spirituality as being a way of life. His style of teaching is simple yet insightful. His wisdom is philosophical, yet pragmatic. Bhaishri’s profound study and reflection of the holy texts awards us with the very essence of these ancient scriptures.

His humble disposition endears him not only to his followers, but also to the respected community of learned saints. He is known as Bhaishri as he fulfils the role of an elder brother providing support, guidance and love.

Enjoy Lord Shiv Bhajans By RamesBhai Oza

RamesBhai Oza Shivanjali Free Download :-


1. BILVA ASTAKAM.mp3

2. DWADASHA JYOTIRLINGAM.mp3

3. NATRAAJ STUTI.mp3

4. NIRVANASHTAKAM.MP3

5. SHIV LINGASHTAKAM.mp3

6. shiv mahimna stotram.mp3

7. SHIV MANAS PUJA.mp3

8. SHIV NIRAJAM.mp3

9. shiv panchakshara stotram.mp3

10. SHIV STAVAH.MP3

11. shiv tandav stotram.mp3

12. shiv upasana.mp3

13. Shiva Tandavam.mp3

14. SHIVASHTAKAM.MP3

15. SHIVOHAM.MP3

16. shree rudrashtakam.mp3


शिव स्तुति (Shiv Stuti)

गल माल रुद्र की सोहे शम्भू के, छम-छम कर नाचे त्रिपुरारी,
डमरू की डम-डम ताल मनोहर, नाचे शंकर दे-दे तारी।

शशि से सोहे शिव भाल मनोहर, कटि में पहने है छाल हरिहर,
गल भोले के व्याल फणिधर, त्रिनेत्र से निकले ज्वाल भयंकर।

जाह्नवी शीश सुशोभित होती, करती जटाओं बीच कल्लोल,
धारण भव ने किया गंग को, कैलाश बीच जटाएँ खोल।

आक धतूरे मन भाए भीम के, घुटे भंग गौरस के संग,
बेलपत्र लगते अति प्यारे, राख़ रचाए समूचे अंग।

सर्वज्ञ हो नंदी सवार, निकले करने जब गगन-विहार,
वाम अंग में मात गौरजा, काही जाय नहीं शोभा अपार।

आशुतोष व्यापकता आपकी, नाथ बखानू मैं किस भांति,
दो शक्ति हे आप दयालु, कर पाऊँ विनती दिन-राति।

हे नाथ दिगंबर अरदास करूँ, कर जोड़े मन विश्वास करूँ,
हो आप कृपा के सागर शम्भो, दो अभय, नाथ अरदास करूँ।



Shri Gaurav Krishna Goswami Ji Maharaj Banke Bihari Bhajans...

इस तरह दिलो - दिमाग पर छा गये हो तुम
कभी खुद को सोचे नही बस तुममे ही रहे गुम
हरपल हर वक्त बस तुम ही तुम , तुम ही तुम
ना जाने क्यूं……

Free Download Gaurav Krishna Goswami Ji Bhajan :-




Kanhaiya Tumhe Ek Nazar Dekhna Hai Hindi Lyrics :-


कन्हैया तुम्हे इक नजर देखना है,
जिधर तुम छुपे हो, उधर देखना है.....
कन्हैया तुम्हे इक.....
विदुर भिलनी के,
घर जो तुमने देखे....
हमारे भी घर को तुम्हे देखना है।
कन्हैया तुम्हे इक.....
उबारा था जिस कर से,
गिद्ध और गज को.....
हमेँ उन हाथोँ का हुनर देखना है।
कन्हैया तुम्हे इक.....
टपकते है दृग बिन्दु,
कह कर ये तुमसे....
तुम्हे अपनी उल्फत मेँ तर देखना है।

कन्हैया तुम्हे इक.....
लगी है निगाहेँ दर पे हमारी,
बुलाके रहेँगे तुम को मुरारी,
हमेँ अपनी चाहत का असर देखना है।
कन्हैया तुम्हे इक नजर देखना है....
कन्हैया तुम्हे इक नजर देखना है,
जिधर तुम छुपे हो, उधर देखना है.....
कन्हैया तुम्हे इक.....



Album : Krishna Diwani Meera
Artist : Swami Krishna Murari, Virendra Negi
Genres : Devotional & Spiritual, Music, Indian
Year : 2001
Label : T-Series

Free Download Krishna Diwani Meera Bai Bhajans :- 



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स्याम मने चाकर राखो जी। गिरधारीलाल चाकर राखो जी।।
चाकर रहसूं बाग लगासूं नित उठ दरसण पासूं।
बिंद्राबन की कुंज गलिन में तेरी लीला गासूं।।
चाकरी में दरसण पाऊं सुमिरण पाऊं खरची।
भाव भगति जागीरी पाऊं तीनूं बातां सरसी।।

मोर मुगट पीतांबर सोहे गल बैजंती माला।
बिंद्राबन में धेनु चरावे मोहन मुरलीवाला।
हरे हरे नित बाग लगाऊंबिच बिच राखूं क्यारी।
सांवरियाके दरसण पाऊंपहर कुसुम्मी सारी।।

जोगि आया जोग करणकूं तप करणे संन्यासी।
हरी भजनकूं साधू आया बिंद्राबनके बासी।।
मीराके प्रभु गहिर गंभीरा सदा रहो जी धीरा।
आधी रात प्रभु दरसन दीन्हें प्रेम नदी के तीरा।।५।।